जब गुज़र रही थी हम पर,तब हमने आसानी से गुज़ार ली ।
अब जब हम किसी को सुनाते हैं कि क्या गुज़री हम पर
तब लगता है कि कैसे कैसे गुज़ारी है हमने।
वो क्या है बाकी अभी भी जोरोज़ सुबह उठाता हैरोज़ जीने के लिए उकसाता हैरोज़ हँसने के लिए मजबूर करता हैरोज़ रोने से रोकता हैरोज़ कुछ नया करवाता हैरोज़ हर हाल में हिम्मत देता हैरोज़ रात सपने सुहाने दिखाता हैवो कुछ तो है बाकी अभी भी