मेरा जीवन मेरी कविता
बुधवार, 15 मार्च 2017
वो क्या है बाकी अभी भी
वो क्या है बाकी अभी भी जो
रोज़ सुबह उठाता है
रोज़ जीने के लिए उकसाता है
रोज़ हँसने के लिए मजबूर करता है
रोज़ रोने से रोकता है
रोज़ कुछ नया करवाता है
रोज़ हर हाल में हिम्मत देता है
रोज़ रात सपने सुहाने दिखाता है
वो कुछ तो है बाकी अभी भी
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