बुधवार, 15 मार्च 2017

जब गुज़र रही थी हम














जब गुज़र रही थी हम पर,तब हमने आसानी से गुज़ार ली ।
अब जब हम किसी को सुनाते हैं कि क्या गुज़री हम पर 
तब लगता है कि कैसे कैसे गुज़ारी है हमने।

वो क्या है बाकी अभी भी










वो क्या है बाकी अभी भी जो
रोज़ सुबह उठाता है
रोज़ जीने के लिए उकसाता है
रोज़ हँसने के लिए मजबूर करता है
रोज़ रोने से रोकता है
रोज़ कुछ नया करवाता है
रोज़ हर हाल में हिम्मत देता है
रोज़ रात सपने सुहाने दिखाता है
वो कुछ तो है बाकी अभी भी

सोमवार, 1 अगस्त 2016

मेरे घर में सन्नाटा है शोर का






मेरे घर में सुबह सुबह
बच्चों के खिलकिलाने की,
लड़ने की आवाज़ें नहीं,
आवाज़ें आती है प्रवचन की,
टीवी पर चल रहे गानों की,
सितार की, संगीत की
दोपहर में खाने पर
आवाज़ें बहसों की,
हँसने की नहीं
आवाज़ें आती हैं
टीवी पर व्यंजन पकाते हुए
किसी शेफ की
दोपहर में आवाज़ें
शांतता की नहीं
आवाज़ें आती हैं
टीवी पर चल रही
किसी फिल्म की
रात में आवाज़ें बोलने की
खिलखिलाने की नहीं
आवाज़ें आती हैं
टीवी पर चल रहे किसी
हिंदी अंग्रेजी श्रृंखला की


मेरे घर में सन्नाटा है शोर का

सोमवार, 27 जून 2016

हमारा जीवन







हमारे बच्चों की आँखों में कौतूहल,
युवाओं की आँखों में अल्हड़ता,
प्रौढ़ों की
आँखों में ठहराव, और
बुज़ुर्गों  की आँखों में वात्सल्य
है तो हमारा जीवन सफल है ।

मेरा हँसना मेरा रोना






कभी बेवजह हँसना
कभी बेवजह रोना
कभी हर बात पर हँसना
कभी हर बात पर रोना
कभी न हँसने वाली बात पर हँसना
कभी न रोने वाली बात पर रोना
कभी रोने वाली बात पर हँसना
कभी हँसने वाली बात पर रोना
ये मेरा रोज़ का हँसना
ये मेरा रोज़ का रोना

बुधवार, 25 मई 2016

मेरे अंदर की बच्ची












मेरे अंदर की बच्ची 



मेरे अंदर की बच्ची 
बहुत उदास रहती है
जो न कभी  हंसती है 
न कभी मुस्कुराती है
मेरे अंदर की बच्ची 
हर छोटे बच्चे की तरह 
खिलखिलाना खेलना 
कूदना चाहती है
पर जाने क्या सोचती रहती है
जाने कौनसी चिंता उसे घेरेे रहती है
वो रोती भी नहीं 
पर हंसती भी नहीं
मैं उस बच्ची को हँसते हुए
खिलखिलाते हुए खेलते हुए
महसूस करना चाहती हूँ
पर आज तक
मेरेे अंदर की
बच्ची जाने क्यों 
उदास रहती है

अब सब ठीक है









अब सब ठीक है

जब लगने लगता है कि 
अब सब ठीक है
ज़िन्दगी आ जाती है
समझाने के लिए कि
बहुत ठोकरें खानी
अभी बाकी है
दिल पर बहुत सी चोटें  लगना
अभी बाकी है
जी भर कर आसूँ बहाना 
अभी बाकी है
बहुत सारे दुःख झेलने
अभी बाकी हैं
ज़िन्दगी जता के जाती है कि
जब ये सब खत्म हो जाए
तब समझना 
अब सब ठीक है

01.10.2015