शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

खिड़की







वो खिड़की खुली रखती थी हमेशा
रात और दिन हमेशा
उस खिड़की से हर मौसम 
उसे छू कर जाता था
वो खिड़की ठण्ड में 
उसे धूप की गर्मी देती थी
गर्मी में हवा उसे शांत करती थी
बारिश में उसे रस की फुआरें
मस्त कर जाती थी
आकाश का छोटा सा टुकड़ा
उसे जीने की सलाह देता था
चिड़ियों की चहचहाट 
उसे सवेरे उठाती थी
पेड़ों की सरसराहट रात 
को उसे सुलाती थी
खिड़की उसे जीवन दान देती थी
वो खिड़की खुली रखती थी हमेशा
रात और दिन हमेशा



09.08.15

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

मेरा अकेलापन





मेरा अकेलापन बचपन से 
मेरा साथी है
इसने मुझे भीड़ में भी अकेला
नहीं छोड़ा
बिमारी में तंदुरुस्ती में
गम में ख़ुशी में
मेरे अकेलेपन ने हमेशा
मेरा साथ दिया
पर अब ये मुझसे उक्ता गया है
मेरा अकेलापन अब मेरा साथ छोड़ना चाहता है
और मैं इसे अकेला छोड़ नहीं सकती
06.07.15

वक़्त थम गया था







क़्त थम गया था
जब आखिरी बार मिले थे
मैं जानती हूँ वक़्त ने
तुम्हारा भी हाल वही किया
होगा जो मेरा किया है
पर मुझे तुम वैसे ही दिखाई देते हो
जैसे तुम तब दिखते थे 
जब हम आखरी बार मिले थे
24.06.15