वो खिड़की खुली रखती थी हमेशा
रात और दिन हमेशा
उस खिड़की से हर मौसम
उसे छू कर जाता था
वो खिड़की ठण्ड में
उसे धूप की गर्मी देती थी
गर्मी में हवा उसे शांत करती थी
बारिश में उसे रस की फुआरें
मस्त कर जाती थी
आकाश का छोटा सा टुकड़ा
उसे जीने की सलाह देता था
चिड़ियों की चहचहाट
उसे सवेरे उठाती थी
पेड़ों की सरसराहट रात
को उसे सुलाती थी
खिड़की उसे जीवन दान देती थी
वो खिड़की खुली रखती थी हमेशा
रात और दिन हमेशा
09.08.15

वाह! बहुत खूब
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर।
जवाब देंहटाएंवाह।