बुधवार, 25 मई 2016

मेरे अंदर की बच्ची












मेरे अंदर की बच्ची 



मेरे अंदर की बच्ची 
बहुत उदास रहती है
जो न कभी  हंसती है 
न कभी मुस्कुराती है
मेरे अंदर की बच्ची 
हर छोटे बच्चे की तरह 
खिलखिलाना खेलना 
कूदना चाहती है
पर जाने क्या सोचती रहती है
जाने कौनसी चिंता उसे घेरेे रहती है
वो रोती भी नहीं 
पर हंसती भी नहीं
मैं उस बच्ची को हँसते हुए
खिलखिलाते हुए खेलते हुए
महसूस करना चाहती हूँ
पर आज तक
मेरेे अंदर की
बच्ची जाने क्यों 
उदास रहती है

अब सब ठीक है









अब सब ठीक है

जब लगने लगता है कि 
अब सब ठीक है
ज़िन्दगी आ जाती है
समझाने के लिए कि
बहुत ठोकरें खानी
अभी बाकी है
दिल पर बहुत सी चोटें  लगना
अभी बाकी है
जी भर कर आसूँ बहाना 
अभी बाकी है
बहुत सारे दुःख झेलने
अभी बाकी हैं
ज़िन्दगी जता के जाती है कि
जब ये सब खत्म हो जाए
तब समझना 
अब सब ठीक है

01.10.2015

फिर से छोटी बच्ची हो जाऊं








फिर से छोटी बच्ची हो जाऊं



जी चाहता है कि फिर से छोटी 
बच्ची हो जाऊं
फिर से माँ पिताजी की
छाया में चली जाऊं
जिनकी छाया में 
दिन भर खेलने पर थकती नहीं थी
सपने  हमेशा देखती थी
ऊँची उड़ान भरने के लिए पंख साथ थे
खेलने की कोशिश आज भी है 
सपने देखने की कोशिश भी जारी है
ऊँची उड़ान भरने की कोशिश भी है
पर आज 
आज खेलने में थक जाती हूँ
सपने देखने में आँखें चुँधियाती हैं
उड़ान भरने के लिए पंख टूटे हैं
जी चाहता है फिर से 
माँ पिताजी के छाया में
चली जाऊँ
29.05.15

तुम बहुत जल्दी चले गए




तुम बहुत जल्दी चले गए

कितनी बातें अनकही रह गयी
दोनों बच्चों की प्यारी प्यारी
शैतानियों की शिकायतें करनी थी
बच्चों की छोटी बड़ी जीत की
खुशियाँ मनानी थी
बच्चों के भविष्य के बारे में साथ
साथ सोचना था
जीवन के सूर्यास्त को साथ साथ
देखना था
तुम्हारी कमी हमेशा रही
पर अब बहुत महसूस होती है
अभी तो बहुत कुछ बाकी है
तुम बहुत जल्दी चले गए

20.09.2015

मंगलवार, 24 मई 2016

मेरा दर्द









मेरा दर्द
जब मुझे दर्द था तो बहुत
तीव्रता से महसूस होता था
अब जब दर्द नहीं है तो
मुझे नहीं याद कि कितना 
दर्द होता था
जब मुश्किलों से गुज़री हूँ तो
बहुत परेशान रही हूँ
अब जब मुश्किलें खत्म हो गयीं हैं 
तो ये भी याद नहीं कि कितनी परेशान थी
जब दुःख थे तो बहुत दुःखी थी
अब जब दुःख खत्म हो गए हैं 
तो ये भी नहीं याद कि कितनीे 
दुःखी थी