बुधवार, 25 मई 2016

तुम बहुत जल्दी चले गए




तुम बहुत जल्दी चले गए

कितनी बातें अनकही रह गयी
दोनों बच्चों की प्यारी प्यारी
शैतानियों की शिकायतें करनी थी
बच्चों की छोटी बड़ी जीत की
खुशियाँ मनानी थी
बच्चों के भविष्य के बारे में साथ
साथ सोचना था
जीवन के सूर्यास्त को साथ साथ
देखना था
तुम्हारी कमी हमेशा रही
पर अब बहुत महसूस होती है
अभी तो बहुत कुछ बाकी है
तुम बहुत जल्दी चले गए

20.09.2015

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